Sunday, July 11, 2021
Safar-एक सफर ऐसा भी |One day bus traveling story |Storytelling | Wonderful experience of bus Sitting on the top
इस बार का सफर बहुत ही खूबसूरत था बहुत ठंड भी लग रही थी लेकिन ऊपर से चारों ओर का नजारा भी बहुत सुंदर दिख रहा था ऐसा लग रहा था मानो की सारी धरती पेड़ पौधे उड़ती हुई चिड़िया ये नदियां सड़के सब कुछ मेरे साथ किसी अनोखी सैर पर निकले हो , थोड़ी ही देर में जब ठंडी-ठंडी हवाओं के कारण मेरे आंखों से आंसू निकलने लगे तो मन बेचैन होने लगा फिर मैंने अपनी बैग से हाफ बंडी वाला जैकेट निकाल कर पहन ली तब जाकर राहत मिली एक बात और मैं इसके पहले शायद ही कभी बस की छत पर बैठा था मैं काफी डरता हूं इसलिए छत पर बैठकर सफर करना मेरे बस की बात नहीं है परंतु समस्या यह थी कि मुझे आज ही पहुंचना था इसलिए घर वालों ने चावल दाल आटा मसाले एवं एक बोतल दूध मेरे साथ दे दिये थे उसे भी लाना था अब मैं अपने गांव के चौक पर खड़े होकर बस का इंतजार करने लगा समय काफी बीत चुका था अचानक एक बस आती हुई दिखाई दी मैं खुश हुआ चलो आखिरकार बस तो आई लेकिन यह क्या बस पूरी तरह भरी हुई थी कंडक्टर ने आने का इशारा किया मैंने सीधे मना कर दिया जगह नहीं है तो मैं नहीं जाऊंगा पर वह बहुत ही प्यार से बोला इसके बाद कोई भी बस नहीं है मैं आगे तक आपको सीट दे दूंगा भरोसा रखिए उसने मेरे दाल चावल की बोरी को पीछे के डिक्की में रख दी थोड़ी देर के लिए ऊपर जाकर बैठने का इशारा किया मजे की बात यह है कि आगे पूरे सफर में बस में लोगों की संख्या बढ़ती गई अब मैं चुपचाप बस के छत पर बैठे सुंदर और मनभावन इस प्रकृति के नजारे का अनुभव करता रहा था ।
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