परन्तु जब परिस्थितियां प्रतिकूल दिखाई देने लगे तो फिर हमें सवाल करना पड़ता है ।
लूट रहा घर-द्वार यहां
बिखर रहा संसार यहां
जिम्मेवार कहां ?
चौकीदार कहां ?
टूट रही सांसे यहां
बिखरी पड़ी है लाशें यहां
श्मशानों में लकड़ी तक का इंतजाम कहां
जिम्मेवार कहां ?
चौकीदार कहां ?
भुखमरी, बेरोजगारी से तड़पते लोगों का आहार कहां
जिम्मेवार कहां ?
चौकीदार कहां ?
झुग्गी-झोपड़ी बस्ती में
जीवन जहां है खस्ती में
दो गज कफन का दाम कहां
हो रहा दवाइयों का व्यापार यहां
जिम्मेवार कहां ?
चौकीदार कहां ?
धर्म से पहले खतरे में है जान यहां
देशभक्ति का प्रमाण कहां ?
जिम्मेवार कहां ?
चौकीदार कहां ?
थोड़ी देर के लिए अपने दिल पर हाथ रख कर सोचोगे तो समझ में आएगा की क्या हो रहा है।
It's time for heal ,Not for Rebel.
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