फिलहाल ये मोहब्बत ना जाने लोगों से क्या-क्या कराएगी
जब तकलीफ बेइंतहा बढ़ जाएगी,
तो फिर उन्हें मौत की नींद सुलाएगी
फिलहाल ये मोहब्बत ना जाने लोगों से क्या-क्या कराएगी
जब दो तरफा प्यार किसी तीसरे में बंटने लगे ,वह भी रिश्ते की आड़ में उस बेटी के बाप के पगड़ी के सम्मान में तो क्या ही गजब हो जाता है , आशिक अपने दिलरूबा से दूर हो जाता है ... बहुत दिनों के बाद जब फिर से उनकी अचानक से मुलाकात होती है तो उनको पिछली सारी भूली-बिसरी बातें यादें आने लगती है , मगर अभी दोनों मजबूर हैं एक किसी के घर की इज्ज़त आबरू है ,तो दूसरा किसी के मांग का सिंदूर है ।
इस कहानी के पुरे एक साल बाद कुछ इससे ही मिलती-जुलती कहानी सामने आती हैं जिसमें एक आशिक अपनी शादीशुदा दिलरूबा के आसपास मंडराता हुआ दिखाई देता है, यह जानने की कोशिश में की वह उससे अब भी मोहब्बत करती है , मगर अब यहां सीन कुछ उल्टा है , उसकी दिलरूबा अब उसे दूर जाने को कहती हैं मगर फिर भी आशिक अपनी दिलरूबा के लिए केयर करते दिखता है, हद तो तब हो जाती है जब उसकी Sweetheart उसकी दी हुई gift को रोड पर फेंक देती है , यह देख जब वह उसे उठाता है ,और अभी देख ही रहा होता है की अचानक से आते ट्रक का शिकार हो जाता है , कुछ देर के लिए सब थम सा जाता है , बहुत सारे लोग उस बीच सड़क पर जमा हो जाते हैं पीछे से दौड़ी- दौड़ी वह लड़की भी आती है , और अब मरने के बाद भी आशिक यही जानना चाहते हैं कि वह उससे मोहब्बत करती है ,
कहीं ना कहीं ऐसी कहानियां आसपास दिख ही जाती है, अब हरेक कोई अपनी Better Half से यही कहना चाहेगा ।
फिलहाल
तुम मेरे साथ हो
मैं तुम्हें सिद्दत से चाहूंगा ,मोहब्बत करूंगा
पर किसी पे तुम्हें प्यार आए
तो बता भी देना ।
यूं घूट-घूट के
खुद को सजा न देना
किसी पे तुम्हें प्यार आए
तो बता भी देना ।
क्या होता गर मैं खफा हो जाता तुमसे
यूं तो मोहब्बत में तड़पते
दो रूहों को सजा ना मिलती
भला मैं कैसे खुद को माफ करूंगा
यह जान कर भी गर दिवार बनूंगा,
क्या तुम दोनों को मिलाना
मेरी वफ़ा न होगी,
फिलहाल
तुम मेरे साथ हो
मैं तुझे सिद्दत से चाहूंगा ,मोहब्बत करूंगा
पर किसी पे तुम्हें प्यार आए
तो बता भी देना ।
यूं घूट-घूट के
खुद को सजा न देना
किसी पे तुम्हें प्यार आए
तो बता भी देना ।
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